Essay on Subhash Chandra Bose in Hindi: मेरे प्यारे दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसे महान नेता के बारे में बताना चाहता हूँ जिन्हें हम सभी प्यार से नेताजी कहते हैं। उनका नाम है सुभाष चंद्र बोस। सुभाष चंद्र बोस पर निबंध लिखते समय मेरा दिल खुशी से भर जाता है, क्योंकि वे हमारे देश के सबसे बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे। बचपन में दादाजी अक्सर उनकी कहानियाँ सुनाया करते थे। रात को सोने से पहले दादाजी कहते, “बेटा, नेताजी जैसे लोग थे तभी आज हम आज़ाद हैं।” उनकी बातें सुनकर मुझे लगता था जैसे कोई सुपरहीरो की कहानी सुन रहा हूँ।
सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। वे एक बड़े और पढ़े-लिखे परिवार से थे। बचपन से ही वे बहुत होशियार और मेहनती थे। स्कूल में हमेशा अच्छे नंबर लाते थे। मुझे याद है, एक बार मेरी सहेली ने कहा था, “अगर मैं नेताजी जैसी मेहनत करूँ तो परीक्षा में हमेशा पहला नंबर आएगा।” सच में, नेताजी ने बहुत मेहनत की। वे इंग्लैंड गए और वहाँ की सबसे कठिन परीक्षा आई.सी.एस. पास की। उस समय आई.सी.एस. पास करना बहुत बड़ी बात थी। अच्छी नौकरी मिल सकती थी। लेकिन नेताजी ने सोचा – नहीं! मैं अपने देश की सेवा करूँगा। उन्होंने नौकरी ठुकरा दी और भारत लौट आए। मुझे लगता है, यह बहुत बड़ा त्याग था। जैसे हम कभी अपना पसंदीदा खिलौना दोस्त को दे देते हैं, वैसे ही उन्होंने अपनी बड़ी नौकरी देश को दे दी।
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नेताजी को देश की आज़ादी का बहुत जुनून था। वे महात्मा गांधी जी से भी मिले, लेकिन उनका रास्ता थोड़ा अलग था। वे मानते थे कि अंग्रेजों से आज़ादी लड़कर ही ली जा सकती है। इसलिए उन्होंने आगे बढ़कर भारतीय राष्ट्रीय सेना बनाई। इसे हम आज़ाद हिंद फौज भी कहते हैं। दूर-दूर देशों में बसे भारतीयों को उन्होंने एकजुट किया। जर्मनी और जापान तक गए। वहाँ से मदद ली। उनकी सबसे प्रसिद्ध बात थी – “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” यह सुनकर सैनिकों का जोश बढ़ जाता था। सोचिए, कितनी हिम्मत थी उनमें! जैसे स्कूल में जब हम ग्रुप में प्रोजेक्ट करते हैं और कोई आगे आकर सबको प्रेरित करता है, वैसे ही नेताजी ने पूरे देश को प्रेरित किया।
एक बार दादाजी ने बताया कि नेताजी ने आज़ाद हिंद सरकार भी बनाई थी। उसमें अपना बैंक, अपना डाक और अपनी मुद्रा थी। बच्चे भी उस सरकार में शामिल होते थे। नेताजी बच्चों से बहुत प्यार करते थे। वे कहते थे कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं। इसलिए वे चाहते थे कि हम पढ़ें-लिखें और मजबूत बनें। मेरे दोस्त और मैं जब खेलते हैं तो कभी-कभी नेताजी बनने का खेल खेलते हैं। कोई कहता है, “जय हिंद!” और हम सब जोर से चिल्लाते हैं। यह खेल खेलते समय लगता है कि हम भी देश के लिए कुछ कर रहे हैं।
नेताजी बहुत साहसी थे। घर में नजरबंद थे, फिर भी छिपकर देश से बाहर निकल गए। लंबा सफर किया। रास्ते में कितनी मुश्किलें आई होंगी! लेकिन वे कभी नहीं रुके। मुझे याद है, एक बार स्कूल में मैं डर गया था स्टेज पर भाषण देने से। टीचर ने कहा, “नेताजी जैसी हिम्मत दिखाओ।” मैंने सोचा और भाषण दे दिया। तब से समझ आया कि नेताजी हमें सिखाते हैं – डरना नहीं, आगे बढ़ना है।
दोस्तों, सुभाष चंद्र बोस आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएँ हमेशा हमारे साथ हैं। वे हमें सिखाते हैं कि देश से बढ़कर कुछ नहीं। हमें मेहनत करनी है, एकजुट रहना है और कभी हार नहीं माननी। आज जब हम स्कूल जाते हैं, खेलते हैं, पढ़ते हैं – यह सब उनकी वजह से संभव है। नेताजी का सपना था एक मजबूत और आज़ाद भारत। हम सब मिलकर उस सपने को पूरा करें। हर साल 23 जनवरी को उनका जन्मदिन मनाते हैं – पराक्रम दिवस के रूप में। उस दिन मैं सोचता हूँ कि मैं भी बड़ा होकर देश के लिए कुछ अच्छा करूँगा।
सुभाष चंद्र बोस पर निबंध लिखते समय मन में बहुत सम्मान उमड़ आता है। वे हमारे सच्चे हीरो हैं। जय हिंद! जय नेताजी!













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